प्रश्नः "सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि उसका नगर नियोजन था।" इस कथन के संदर्भ में सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) के नगर नियोजन की प्रमुख विशेषताओं तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर चर्चा कीजिए। (150 शब्द) (UPSC/RAS)
Read in:AI translation — may contain inaccuracies
सिंधु घाटी सभ्यता (लगभग 2500 ई.पू. - 1900 ई.पू.) कांस्य युग की एक ऐसी नगरीय सभ्यता थी, जिसने अपनी समकालीन मेसोपोटामिया और मिस्र की सभ्यताओं से कहीं अधिक उन्नत और वैज्ञानिक नगर नियोजन (Urban Planning) का प्रदर्शन किया। इसकी यही विशेषता इसे आधुनिक शहरीकरण का एक 'ब्लूप्रिंट' बनाती है।
नगर नियोजन की प्रमुख विशेषताएं
ग्रिड प्रणाली (Grid System): सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं (चेस-बोर्ड पैटर्न)। आधुनिक उदाहरणः भारत का पहला नियोजित आधुनिक शहरचंडीगढ़और मध्यकालीन भारत में जयपुर इसी प्रणाली पर आधारित हैं।
द्वि-विभाजित नगर संरचनाः नगर स्पष्ट रूप से दो भागों - पश्चिम में उच्च दुर्ग (Citadel) और पूर्व में निचले शहर (Lower Town) में विभाजित थे। आधुनिक उदाहरणः वर्तमान लोकतांत्रिक ढांचे में राज्यों के प्रशासनिक ब्लॉक (जैसे दिल्ली का लुटियंस ज़ोन या सचिवालय) सुरक्षा और सुचारू प्रशासन के लिए इसी तर्ज पर स्थापित हैं।
जल निकासी एवं स्वच्छताः प्रत्येक घर की नाली मुख्य सड़क की ढकी हुई नालियों से जुड़ती थी। इनमें साफ-सफाई के लिए नियमित अंतराल पर मैनहोल (Silt Traps) बने हुए थे।
उन्नत जल संरक्षणःधोलावीरा में खोजी गई 16 से अधिक बड़े जलाशयों (Reservoirs) की श्रृंखला उनके उत्कृष्ट जल संचयन और प्रबंधन कौशल को दर्शाती है।
वर्तमान समय में प्रासंगिकता (Relevance in Present Times)
IVC की विशेषता
वर्तमान योजना / व्यावहारिक उपयोग
ग्रिड और नियोजित संरचना
स्मार्ट सिटी मिशन और RURBAN मिशन के तहत सुनियोजित, पर्यावरण-अनुकूल और व्यवस्थित शहरीकरण में मार्गदर्शक।
उन्नत ढकी हुई नालियां
वर्तमान महानगरों में जलभराव एवं शहरी बाढ़ (Urban Flooding) की विकट समस्या के समाधान हेतु अमृत (AMRUT 2.0) योजना में प्रासंगिक।
धोलावीरा का वाटर हार्वेस्टिंग
नीति आयोग द्वारा रिपोर्ट किए गए गंभीर शहरी जल संकट से निपटने के लिए 'जल शक्ति अभियान' हेतु एक आदर्श मॉडल ।
स्वच्छता और सार्वजनिक स्नानागार
स्वास्थ्य एवं कचरा प्रबंधन के प्रति उनकी सजगता सीधे भारत सरकार के स्वच्छ भारत अभियान के दर्शन से मेल खाती है।
हवादार मकान (Eco-friendly)
खिड़कियां मुख्य सड़क के बजाय गलियों में खुलना (ध्वनि व धूल प्रदूषण से बचाव) वर्तमान के 'ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट' के अनुकूल है।
निष्कर्षः
IVC का नगर नियोजन केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं था, बल्कि वह 'नागरिक-केंद्रित शासन' और सतत विकास (Sustainable Development) का उत्कृष्ट उदाहरण था। आज जब भारत तीव्र शहरीकरण के दौर से गुजर रहा है, तो IVC के सिद्धांत हमें प्राचीन तकनीक और आधुनिक दृष्टि के समन्वय द्वारा सतत विकास लक्ष्य-11 (SDG-11: सुरक्षित, लचीले और टिकाऊ शहर) को प्राप्त करने का सर्वोत्तम मार्ग दिखाते हैं।