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अंतरिक्ष जैव प्रौद्योगिकीः अंतरिक्ष में भारत की नई उपलब्धियाँ

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  • चर्चा में क्यों?: भारतीय वैज्ञानिकों ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) के तहत अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर स्वदेशी सूक्ष्म शैवाल और सायनोबैक्टीरिया का सफल परीक्षण किया है।
  • प्रयोग: अंतरिक्ष के सूक्ष्म-गुरुत्वाकर्षण और उच्च CO2 वातावरण में सूक्ष्मजीवों के विकास और उनकी कार्यक्षमता का अध्ययन करना।
  • मुख्य घटक
    • सूक्ष्म शैवालः क्लोरेला सोरोकिनियाना, पैराक्लोरेला केसलेरी, डिस्मॉर्फाेकोकस ग्लोबोसस।
    • सायनोबैक्टीरियाः स्पिरुलिना और साइनोकोकस (नाइट्रोजन/यूरिया पुनर्चक्रण हेतु)।
  • लाभ
    • लाइफ सपोर्टः अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ऑक्सीजन का उत्पादन और CO2 का अवशोषण।
    • सुपर-फूडः अंतरिक्ष में ही ताजा पोषक तत्वों और प्रोटीन युक्त खाद्य पूरक की उपलब्धता।
    • अपशिष्ट प्रबंधनः यूरिया और नाइट्रोजन को रिसायकल कर जैविक जीवन समर्थन तंत्र (BLSS) विकसित करना।
    • औद्योगिक विकासः पृथ्वी पर जैव-ईंधन और कार्बन कैप्चर के लिए ‘मजबूत’ प्रजातियों का विकास।