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सेमीकॉन 1.0 की सफलता को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 15 जुलाई 2026 को सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दे दी है।
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उद्देश्य: भारत में सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, विनिर्माण और अनुसंधान का मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना तथा देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाना
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बजट आवंटन: ₹1,27,500 करोड़।
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छह प्रमुख स्तंभ:
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डिजाइन: चिप डिजाइन प्रणाली को मजबूत करना (105 स्टार्टअप्स पहले ही कार्यरत)।
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मशीनें और सामग्रियां: विनिर्माण के लिए आवश्यक रसायनों, गैसों और मशीनों के उत्पादन तथा अनुसंधान को प्रोत्साहन।
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अधिक फैब्रिकेशन संयंत्र (फैब) स्थापित करना: सिलिकॉन फैब, कंपाउंड और डिस्प्ले फैब को आकर्षित करना (2028 तक पहले फैब के चालू होने की उम्मीद)।
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ATMP/OSAT उद्योग को और मजबूत बनाना: उन्नत असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) तकनीकों को भारत लाना।
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अनुसंधान एवं विकास (R&D): उन्नत नोड्स (28nm-110nm से आगे) विकसित करने पर ध्यान।
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प्रतिभा विकास: 315 विश्वविद्यालयों में 68,000 छात्रों को EDA (इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन) उपकरणों का प्रशिक्षण। इसे और विकसित किया जाएगा तथा कॉलेज में प्रशिक्षण के स्तर को और गहन किया जाएगा।
सेमीकॉन 1.0 की प्रगति: इसके तहत ₹76,000 करोड़ स्वीकृत किए गए थे, जिसमें 1.64 लाख करोड़ रुपये के निवेश वाली 12 विनिर्माण इकाइयों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें से माइक्रोन (Micron), केन्स (Kaynes) और सीजी सेमी (CG Semi) ने वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू कर दिया है।