उत्तर-
- भारतीय सभ्यता, सांस्कृतिक मूल्यों तथा स्वतंत्रता की चेतना से प्रेरित होकर अनेक विदेशी व्यक्तियों ने भारत से गहरा आत्मीय संबंध स्थापित किया। उन्होंने लेखन, विचार-विमर्श, जनआंदोलनों और प्रत्यक्ष राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इनका योगदान
एनी बिसेंट (आयरलैंड)-
- समाजवादी, थियोसोफिस्ट तथा महिला अधिकारों की समर्थक एनी बेसेंट भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की प्रमुख विदेशी हस्तियों में थीं।
- इन्होंने भारतीय राजनीति में सक्रिय भागीदारी करते हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की।
- 1916 में उन्होंने होम रूल लीग आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य ब्रिटिश साम्राज्य के अंतर्गत भारत को स्वशासन दिलाना था।
- अपने प्रभावशाली लेखन, भाषणों और राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने भारतीयों में राष्ट्रीय चेतना का प्रसार किया तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक समर्थन दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
सिस्टर निवेदिता (आयरलैंड)-
- सिस्टर निवेदिता समाजसेवी, लेखिका तथा स्वामी विवेकानंद की समर्पित शिष्या थीं।
- उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन भारत की सांस्कृतिक पुनर्जागरण, राष्ट्रीय चेतना और शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित कर दिया।
- उन्होंने अरविंद घोष तथा बाघा जतिन जैसे क्रांतिकारियों को वैचारिक, नैतिक एवं आर्थिक सहयोग प्रदान किया।
- अपने लेखन, व्याख्यानों और सामाजिक कार्यों के माध्यम से उन्होंने भारतीयों में राष्ट्रीय स्वाभिमान का संचार किया तथा भारत की स्वतंत्रता और जनजागरण के पक्ष में देश-विदेश में प्रभावी जनमत तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
A. O. ह्यूम (इंग्लैंड)-
- ब्रिटिश सिविल सेवक A. O. ह्यूम भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के प्रारंभिक चरण के प्रमुख व्यक्तित्व थे।
- उन्होंने 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में निर्णायक भूमिका निभाई।
- प्रारंभ में उनका उद्देश्य ब्रिटिश प्रशासन और भारतीयों के बीच संवाद स्थापित कर राजनीतिक असंतोष को संवैधानिक माध्यम प्रदान करना था, किंतु समय के साथ यही संस्था भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक मंच बन गई।
- ह्यूम के इस प्रयास ने भारत में संगठित राष्ट्रीय राजनीति की नींव रखने तथा स्वतंत्रता संघर्ष को संस्थागत स्वरूप प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
- भारत में संगठनात्मक ढाँचे को गति प्रदान की।
हेनरी लुई विवियन डेरोजियो-
- हेनरी विवियन डेरोजियो भारतीय पुनर्जागरण के अग्रदूत, शिक्षाविद्, कवि एवं समाज-सुधारक थे।
- उन्होंने यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करते हुए युवाओं में तर्कशीलता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, स्वतंत्र चिंतन तथा राष्ट्रप्रेम की भावना का विकास किया।
- हिंदू कॉलेज में अध्यापन के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को सामाजिक कुरीतियों, रूढ़िवाद और औपनिवेशिक दमन के विरुद्ध जागरूक किया।
वेब मिलर (अमेरिका)-
- सविनय अवज्ञा आन्दोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया।
- गांधीजी की दांडी यात्रा में गांधीजी के साथ नामक क़ानून तोड़ा।
फादर कामिल बुल्के (बेल्जियम)-
- बेल्जियम से आए फादर बुल्के ने हिंदी भाषा और साहित्य की अपार सेवा की।
- इन्होंने हिंदी साहित्य में अद्वितीय योगदान देकर स्वतंत्रता आंदोलन को गति प्रदान की।
- इन विदेशी व्यक्तित्वों ने अपने विचारों, संगठनात्मक क्षमता, आर्थिक सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय समर्थन के माध्यम से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और व्यापक स्वरूप प्रदान किया। उनकी सहभागिता यह सिद्ध करती है कि भारत का स्वतंत्रता संग्राम केवल राष्ट्रीय संघर्ष नहीं था, बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और मानव गरिमा जैसे सार्वभौमिक मूल्यों की स्थापना का वैश्विक अभियान भी था।