उत्तर :-
- गुरु नानक देव ने मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन को व्यापक और गहन बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैसे-
- एकेश्वरवाद निर्गुण भक्ति परंपरा पर बल-
-एक ईश्वर में विश्वास का उपदेश देकर उसे निर्गुण, निराकार और निर्विशेष बताया। - कर्मकांड और रूढ़िवादिता का विरोध-
-धार्मिक अनुष्ठानों, मूर्ति पूजा, अंधविश्वास और अवतारवाद के विरोध सहित ब्राह्मणवादी और इस्लामी दोनों की रूढ़िवादिता की आलोचना की। - सामाजिक समानता-
-जाति, वर्ण व्यवस्था और सामाजिक असमानताओं को अस्वीकार कर मानव समानता पर बल दिया। जैसे- लंगर (सामुदायिक रसोई) की शुरुआत की, जो समानता और सामूहिकता का प्रतीक थी। - सार्वभौमिकता और धार्मिक समन्वय-
-उनके संदेश “सच्चे हिन्दू या सच्चे मुसलमान बनो” जैसी नैतिक शिक्षा ने धार्मिक एकता पर जोर दिया। - स्थानीय भाषा का प्रयोग-
-पंजाबी जैसी सरल भाषाओं में उपदेश दिए, जिससे आम लोगों तक आध्यात्मिक विचार आसानी से पहुँचे। - व्यापक यात्राएँ-
-उन्होंने मक्का, मदीना और बगदाद जैसे धार्मिक स्थानों की यात्राएँ की और भक्ति, समानता तथा एकता का संदेश फैलायाl - सिख धर्म की स्थापना-
-उनकी शिक्षाओं ने सिख धर्म की नींव रखी, जिसने भक्ति आंदोलन के अनेक आदर्शों को संस्थागत रूप दिया।
निष्कर्षत: गुरु नानक देव ने न केवल भक्ति आंदोलन को समृद्ध किया, बल्कि उसे अधिक सार्वभौमिक, समानतावादी और व्यावहारिक स्वरूप प्रदान किया।