इन्होंने द मेटियोरिटिकल सोसायटी का फेलो बनने वाली पहली भारतीय महिला बनकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
अहमदाबाद स्थित 'भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला' (PRL) की वैज्ञानिक और प्रोफेसर है
ऐतिहासिक सम्मान: वर्ष 1933 में स्थापित इस संस्था के 93 साल के इतिहास में यह सम्मान पाने वाली वह केवल तीसरी भारतीय वैज्ञानिक हैं, उनसे पहले केवल देवेंद्र लाल और जे.एन. गोस्वामी को यह सम्मान मिला था।
अनुसंधान क्षेत्र: उन्हें कॉस्मोकेमिस्ट्री (ब्रह्मांड रसायन विज्ञान) और उल्कापिंड विज्ञान (Meteoritics) के क्षेत्र में उनके शानदार योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया है
महत्वपूर्ण योगदान: प्रोफेसर मरहास ने प्राचीन बाह्य-स्थलीय पदार्थों, उल्कापिंडों और पूर्व-सौर कणों (pre-solar grains) का अध्ययन करके हमारे सौर मंडल की उत्पत्ति और निर्माण को समझने में अहम भूमिका निभाई है।