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यह 2026–2031 की अवधि के लिए भारत और विश्व बैंक समूह के मध्य एक रणनीतिक भागीदारी है।
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उद्देश्य:
- अगले 5 वर्षों में प्रतिवर्ष 8 -10 बिलियन डॉलर के वित्तपोषण के साथ देश के शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में रोजगार सृजन में तेजी लाना।
- यह अगले दशक में भारत की उच्च-मध्यम-आय अर्थव्यवस्था बनने की आकांक्षा और 2047 तक विकसित भारत के विजन को समर्थन देने हेतु एक सुदृढ़ रोडमैप निर्धारित करता है।
- CPF में अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा और विविधीकृत मूल्य शृंखलाओं में निवेश के माध्यम से संरचनात्मक सुधारों, शहरी रूपांतरण और ग्रामीण समृद्धि पर बल दिया गया है।
- इसका उद्देश्य निजी पूंजी को आकर्षित करना, युवाओं और महिलाओं के कौशल उन्नयन द्वारा मानव पूंजी को सुदृढ़ करना तथा सभी क्षेत्रों में जलवायु अनुकूलता को समाहित करना है।
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देश भागीदारी फ्रेमवर्क के बारे में:
- विश्व बैंक का देश भागीदारी फ्रेमवर्क (CPF) सामान्यतः 4 से 6 वर्षीय एक रणनीतिक दस्तावेज होता है, जो किसी देश के साथ बैंक की विकास प्राथमिकताओं और नियोजित सहभागिता को रेखांकित करता है।
- इसे भागीदार सरकार के साथ मिलकर विकसित किया जाता है, ताकि बैंक का समर्थन देश के विकास उद्देश्यों के अनुरूप हो सके।
टिप्पणी:
- समाचार: हाल ही में श्रीलंका और विश्व बैंक समूह ने भी एक नई पाँच वर्षीय भागीदारी प्रारंभ की है।
- उद्देश्य:
- द्वीप राष्ट्र की आर्थिक पुनर्बहाली को समर्थन देना और निजी निवेश को प्रोत्साहित करना।
- यह श्रीलंका की निरंतर आर्थिक पुनर्बहाली को समर्थन देगा, 7% मध्यम-अवधि आर्थिक विकास लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करेगा तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।
- ये सुधार 2030 तक वार्षिक निर्यात आय को दोगुना कर 36 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचाने की श्रीलंका की महत्त्वाकांक्षा को भी समर्थन प्रदान करेंगे।