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भारत की कूटनीति के पाँच सिद्धांत

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अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ प्रो. सी. राजा मोहन ने दिए हैं !

  1. पारस्परिकता (Reciprocity): भारत रणनीतिक भागीदारों के साथ आपसी सहयोग और विश्वास पर जोर देता है, और उन देशों का समर्थन करता है जो राष्ट्रीय हितों के प्रति समान प्रतिबद्धता दिखाते हैं।
  2. विविधीकरण (Diversification): रणनीतिक और आर्थिक मामलों में किसी एक देश या गुट पर निर्भरता कम करके अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियों का तेजी से विस्तार करना।
  3. रणनीतिक लचीलापन (Strategic Flexibility): विदेश नीति के निर्णयों में पूर्ण स्वतंत्रता बनाए रखना और वैश्विक ध्रुवीकरण (जैसे क्वाड और ब्रिक्स दोनों में सक्रियता) के बावजूद अपने हितों को सर्वोपरि रखना।
  4. रणनीतिक विस्तार (Strategic Expansion): वैश्विक राजनीति और अर्थशास्त्र में उभरते हुए क्षेत्रों—विशेष रूप से अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र—की ओर कूटनीतिक पहुंच का दायरा बढ़ाना।
  5. घरेलू नवीनीकरण (Domestic Renewal): कूटनीति की सफलता अंततः आंतरिक आर्थिक और सैन्य शक्ति पर निर्भर करती है। इसलिए, देश के आंतरिक विकास और क्षमताओं को मजबूत करना कूटनीति का प्रमुख आधार है।