Ans.
-सिंधु घाटी सभ्यता में मुख्यतः तीन प्रकार की मूर्तियाँ—धातु, पत्थर और टेराकोटा (पकी हुई मिट्टी) निर्मित की गईं।
-इनमें से टेराकोटा मूर्तियाँ सबसे अधिक सामान्य थीं और इन्हें आग में पकी हुई मिट्टी से बनाया जाता था।
-टेराकोटा मूर्तियों में मानव आकृतियाँ, पशु, पक्षी, खिलौना गाड़ियाँ, खिलौना हल, सीटी, झुनझुने और गुड़िया शामिल थीं।
- ये वस्तुएँ हड़प्पा समाज के दैनिक जीवन, कलात्मक कौशल और खेलप्रिय स्वभाव को दर्शाती हैं। कई खिलौनों में चलने वाले पहिए होते थे, जो उन्नत कारीगरी को दर्शाते हैं।
-सबसे महत्वपूर्ण टेराकोटा आकृति मातृ देवी (Mother Goddess) की मूर्ति है, जिसे उर्वरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
-इसके अलावा, बैल, कुत्ते, बंदर, पक्षी और अन्य पशुओं की आकृतियाँ भी बड़ी संख्या में प्राप्त हुई हैं।
-ये टेराकोटा मूर्तियाँ सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों के धार्मिक विश्वास, वेशभूषा, आभूषण, आर्थिक गतिविधियों और सांस्कृतिक जीवन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं। इसलिए, ये हड़प्पा कला और समाज को समझने का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं।