Menu

भारत में एआई-संचालित वित्तीय समावेशन

Read in:
  • भारत की वित्तीय समावेशन यात्रा डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संयोजन के साथ एक परिवर्तनकारी बदलाव के दौर से गुजर रही है। आधारभूत बैंकिंग पहुंच से शुरू हुई यह यात्रा अब एक प्रौद्योगिकी-संचालित, बुद्धिमत्तापूर्ण और वास्तविक समय (Real-time) की वित्तीय सेवाएं प्रदान करने वाले इकोसिस्टम में बदल गई है।

  • एआई उन्नत एनालिटिक्स और सहमति-आधारित डेटा-साझाकरण का लाभ उठाकर वित्तीय सेवाओं के डिजाइन और वितरण के तरीके को बदल रहा है।

  • यह परिवर्तन विशेष रूप से एमएसएमई, अनौपचारिक श्रमिकों, ग्रामीण आबादी और महिला केंद्रित उद्यमों (जिन्हें "ऋण लेने वाले नए" क्षेत्र कहा जाता है) के लिए अत्यधिक प्रभावशाली है।

वित्तीय समावेशन मुख्य रूप से निर्बल वर्गों और निम्न आय समूहों जैसे कमजोर समूहों के लिए समय पर, पर्याप्त और किफायती ऋण के साथ वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने की प्रक्रिया है। भारत में, यह एक नीतिगत लक्ष्य से डिजिटल-फर्स्ट वास्‍तविकता में बदल गया है।

वित्तीय समावेशन का डिजिटल रूपांतरण

    • यह सार्वभौमिक बैंक खातों, बायोमेट्रिक पहचान और मोबाइल कनेक्टिविटी का संयोजन है

    • उद्देश्य: प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट वित्तीय पहचान और राज्य से सीधा संबंध प्रदान करना 

    • आधार: मार्च 2026 तक सुरक्षित प्रमाणीकरण के लिए 144 करोड़ से अधिक आधार नंबर बनाए गए हैं।

    • जन धन खाते: 2015 के 14.72 करोड़ से बढ़कर 29 अप्रैल 2026 तक 58.16 करोड़ हो गए हैं, जिनमें कुल 3.02 लाख करोड़ रुपये जमा हैं।

    • मोबाइल कनेक्टिविटी: 125.87 करोड़ वायरलेस ग्राहक हैं और 5G सेवाओं ने 99.9 प्रतिशत जिलों (85% आबादी) को कवर कर लिया है।

    • यह एक वास्तविक समय भुगतान प्रणाली है जो मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किन्हीं दो बैंक खातों के बीच तत्काल धन हस्तांतरण की अनुमति देती है।

    • उद्देश्य:  छोटे व्यापारियों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं दोनों के लिए निम्‍न लागत, अंतर-संचालित और सुरक्षित अनुभव प्रदान करके डिजिटल भुगतान का लोकतंत्रीकरण करना

    • मार्च 2026 में 29.53 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 2,264.11 करोड़ यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए।

    • 691 लाइव बैंकों के साथ, यह भारत में कुल खुदरा भुगतान मात्रा का लगभग 81 प्रतिशत हिस्सा है।

    • सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है।

    • प्राथमिक लक्ष्य:  बिचौलियों को हटाकर पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाना है, जिससे सामाजिक कल्याण के वितरण में राजस्‍व रिसाव और विलम्‍ब को समाप्त किया जा सके

    • जनवरी 2026 तक नागरिकों को सीधे 49.09 लाख करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए।

    • फर्जी लाभार्थियों को हटाकर सरकार ने 4.31 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत की है।

वित्त में एआई को सक्षम करने वाली नीतिगत पहलें 

    • फरवरी 2026 में, डिजिटल इंडिया भाषिनी डिवीजन (DIBD) और RBI ने बैंकिंग सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

    • इसका लक्ष्य सभी 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं में बैंकिंग सेवाएं प्रदान करना है।

    • बैंकिंग शब्दावली और नियामक दिशानिर्देशों को एकीकृत करने के लिए एक डोमेन-विशिष्ट मॉडल "बैंकिंग भाषिनी" विकसित किया जाएगा।

भाषादान पूरे भारत में लोगों से भाषण, पाठ और अनुवाद एकत्र करता है और एआई सिस्टम को प्रशिक्षित करने के लिए उनका उपयोग करता है। 

    • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने फिनटेक सेक्‍टर में जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा देने, दक्षता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए नियामक सैंडबॉक्स (RS) के लिए सक्षम ढांचा पेश किया।

    • यह फिनटेक स्टार्टअप्स और बैंकों को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले नियामक पर्यवेक्षण के तहत नए उत्पादों (जैसे API सेवाएं, डिजिटल KYC) के परीक्षण के लिए एक नियंत्रित वातावरण देता है।

एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस (API) नियमों और प्रोटोकॉल का एक समूह है जो विभिन्न सॉफ्टवेयर अनुप्रयोगों को एक दूसरे के साथ संचार और डेटा का आदान-प्रदान करने में सक्षम बनाता है। 

    • इसे रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) द्वारा दिसंबर 2024 में लॉन्च किया गया।

    • यह एक उन्नत एआई-संचालित उपकरण है जो धन शोधन और साइबर अपराधों में उपयोग किए जाने वाले "म्यूल" (Mule) बैंक खातों की पहचान करता है।

म्‍यूल खातों, जिनका उपयोग अक्सर धन शोधन और साइबर अपराध को सुविधाजनक बनाने के लिए किया जाता है, ने पारंपरिक पहचान दृष्टिकोणों के लिए लगातार कठिनाइयाँ पैदा की हैं। 

    • अक्टूबर 2025 में घोषित यह मिशन भारत के 49 करोड़ अनौपचारिक श्रमिकों के लिए एक एआई-संचालित इकोसिस्टम है।

    • यह संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने के लिए एआई, ब्लॉकचेन और इमर्सिव लर्निंग का उपयोग करता है।

एआई-आधारित क्रेडिट स्कोरिंग और ऋण पहुंच

  • परंपरागत रूप से, क्रेडिट इतिहास न होने के कारण कई लोगों को ऋण नहीं मिल पाता था। एआई अब वैकल्पिक डेटा (जैसे डिजिटल भुगतान लेनदेन, जीएसटी फाइलिंग, बैंक स्टेटमेंट) का उपयोग करके क्रेडिट योग्यता का आकलन करता है।

  • इससे 130-170 बिलियन डॉलर के अनुमानित ऋण अंतर को पाटने की क्षमता उत्पन्न हुई है।

  • एकीकृत ऋण इंटरफ़ेस (ULI - Unified Lending Interface):

    • यह ऋण देने के क्षेत्र में एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) के रूप में कार्य करता है, जो कई डेटा स्रोतों (भूमि रिकॉर्ड, प्रमाणीकरण सेवाएं आदि) तक डिजिटल पहुंच सक्षम बनाता है।

    • 12 दिसंबर, 2025 तक, 64 ऋणदाता (41 बैंक और 23 NBFC) इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं।

    • इसका विस्तार क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCB) तक किया जा रहा है।

डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI) अंत:पारस्‍परिक डिजिटल सिस्टम को संदर्भित करता है- जैसे कि डिजिटल पहचान, भुगतान प्लेटफॉर्म और डेटा एक्सचेंज ढांचा जो सुरक्षित और कुशल सेवा वितरण को सक्षम करते हैं। 

  • अकाउंट एग्रीगेटर (AA) फ्रेमवर्क:

    • यह RBI द्वारा पेश की गई एक वित्तीय डेटा साझाकरण प्रणाली है, जो उपयोगकर्ताओं की सहमति के आधार पर संस्थानों के बीच सुरक्षित रूप से वित्तीय डेटा साझा करने में सक्षम बनाती है।

    • यह ऋण अनुमोदन के समय और दस्तावेज़ीकरण को काफी कम करता है।

    • 31 दिसंबर 2025 तक 252.9 मिलियन उपयोगकर्ताओं ने अपने खातों को AA फ्रेमवर्क से जोड़ा है।

अकाउंट एग्रीगेटर (AA) एनबीएफसी हैं जो ग्राहक की वित्तीय जानकारी की पुनर्प्राप्ति और समेकन की सुविधा प्रदान करते हैं। वे किसी व्यक्ति के निर्देश और सहमति के आधार पर एक वित्तीय संस्थान से दूसरे में डेटा स्थानांतरित करते हैं। 

निष्कर्ष

एआई और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) के सहयोगात्मक प्रयासों से भारत की वित्तीय प्रणाली अधिक पारदर्शी, कुशल और समावेशी बन रही है। अकाउंट एग्रीगेटर जैसे फ्रेमवर्क और वैकल्पिक डेटा पर आधारित एआई क्रेडिट मॉडल 'विकसित भारत 2047' के विजन को साकार करने और सतत आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।।

SOURCE: PIB