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अध्याय:1 कृषि-खाद्य प्रणालियों में रूपांतरण

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राज्य में कृषि

  1. योगदान एवं वृद्धि 
  2. उत्पादन एवं उत्पादकता 
  3. किसानों के लिए एकीकृत प्रणाली
  4. सतत उद्यानिकी 
  5. फसल कटाई के बाद प्रबंधन 
  6. पशुपालन व डेयरी 
  7. कृषक कल्याण पहल

1. राज्य में कृषि की स्थिति – कृषि व संबद्ध क्षेत्र का योगदान व वृद्धि

A. GVA (Gross Value Added)

कृषि व संबद्ध क्षेत्र स्थिर मूल्यों पर वृद्धि प्रचलित मूल्यों पर वृद्धि
GVA में योगदान (% में) 25.33% 0.22% 25.74% 3.47%
GVA में योगदान (₹ में) 2.23 लाख करोड़   4.41 लाख करोड़  
वार्षिक वृद्धि (2021–22 से 2025-26 के बीच) (CAGR) 3.82% 8.10%

B. कृषि क्षेत्र के उपक्षेत्रों का योगदान – (प्रचलित मूल्यों पर)

क्षेत्र योगदान परिवर्तन
1. पशुधन 49.35% 5.20% वृद्धि
2. फसल क्षेत्र 42.61% 5.01% कमी
3. वानिकी एवं लॉगिंग 7.49% 2.67% वृद्धि
4. मत्स्य क्षेत्र 0.54% 0.87% वृद्धि

नोट: वर्ष 2025–26 में फसल क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन (Gross Value Added - GVA) प्रचलित कीमतों पर ₹1.88 लाख करोड़ रहा है, जबकि पशुधन क्षेत्र का सकल मूल्य वर्धन ₹2.17 लाख करोड़ रहा है। पशुधन क्षेत्र की आय में दूध का प्रमुख योगदान है।

  • प्रचलित कीमतों पर वर्ष 2025–26 में सकल मूल्य उत्पादन (GVO) में पशुधन उत्पादों का प्रतिशत हिस्सा
दूध  79.60%
अन्य  12.27%
पोल्ट्री सहित मांस 7.46%
अंडे 0.67%

भू-उपयोग (Land Use):

  • राज्य का कुल क्षेत्रफल: 343.43 लाख हेक्टेयर
भूमि का प्रकार प्रतिशत
1. शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल 53.02%
2. बंजर भूमि 10.11%
3. वानिकी (वन क्षेत्र) 8.30%
4. ऊसर तथा कृषि अयोग्य भूमि 6.85%
5. कृषि के अतिरिक्त अन्य उपयोगी भूमि 5.96%
6. अन्य चालू पड़त भूमि 5.62%
7. स्थायी चारागाह 4.81%
8. चालू पड़त 5.22%
9. वृक्षों के झुंड तथा बाग 0.11%

प्रचलित जोतधारक

  कृषि गणना (2015–16) परिवर्तन (2010–11 से)
1. कुल जोतों का क्षेत्रफल 208.73 लाख हेक्टेयर 1.24% कमी
2. कुल प्रचलित भूमि जोतों की संख्या 76.55 लाख 11.14% वृद्धि
3. भूमि जोतों का औसत आकार 2.73 हेक्टेयर 11.07% कमी

जोतधारक

जोत का आकार प्रतिशत परिवर्तन
सीमांत भूमि जोत (1 हेक्टेयर से कम) 40.12% 19.79% वृद्धि
लघु (Small) (1–2 हेक्टेयर) 21.90% 10.50% वृद्धि
अर्द्ध-मध्यम (2–4 हेक्टेयर) 18.50% 5.67% वृद्धि
मध्यम (4–10 हेक्टेयर) 14.79% 0.27% कमी
बड़े आकार की जोत (10 हेक्टेयर से अधिक) 4.69% 13.20% कमी

नोट: वर्ष 2010–11 की तुलना में 2015–16 में सीमांत, लघु, अर्द्ध-मध्यम एवं मध्यम आकार वर्गों की जोतों की संख्या में वृद्धि हुई है, जबकि बड़े आकार वर्ग की जोतों की संख्या में 11.14% की कमी दर्ज की गई है।

महिला प्रचलित जोतधारक (2015–16)

  • संख्या: 7.75 लाख (41.94% वृद्धि)
  • क्षेत्रफल: 16.55 लाख हेक्टेयर (24.44% वृद्धि)
 महिला जोतधारक परिवर्तन
सीमांत भूमि जोत (1 हेक्टेयर से कम) 49.55% वृद्धि
लघु (Small) (1–2 हेक्टेयर) 20.77% वृद्धि
अर्द्ध-मध्यम (2–4 हेक्टेयर) 14.97% वृद्धि
मध्यम (4–10 हेक्टेयर) 11.74% वृद्धि
बड़े आकार की जोत (10 हेक्टेयर से अधिक) 2.97% वृद्धि

2. उत्पादन एवं उत्पादकता 

खाद्यान्न उत्पादन (2025–26)
283.98 लाख मीट्रिक टन (LMT) — 8.28% की कमी

अनाज उत्पादन (2025–26)
236.85 लाख मीट्रिक टन (LMT)

दलहन उत्पादन (2025–26)
47.13 लाख मीट्रिक टन (LMT)

खरीफ उत्पादन (2025–26)
69.03 लाख मीट्रिक टन (LMT) (26.71% की कमी)
रबी उत्पादन (2025–26)
167.82 लाख मीट्रिक टन (LMT) (3.35% की कमी)
खरीफ उत्पादन (2025–26)
20.52 लाख मीट्रिक टन (LMT) (2.34% की वृद्धि)
रबी उत्पादन (2025–26)
26.61 लाख मीट्रिक टन (LMT) (22.34% की वृद्धि)
तिलहन (Oilseeds)
उत्पादन (2025–26) (LMT) परिवर्तन 
100.46 (7.18% की वृद्धि)
गन्ना (Sugarcane)
उत्पादन (2025–26) (LMT) परिवर्तन 
3.61 22.37% की कमी 
कपास (Cotton)
उत्पादन (2025–26) (LMT) परिवर्तन 
17.94 लाख गांठे 0.34% वृद्धि

विभिन्न कृषि फसलों में राजस्थान का स्थान

राजस्थान प्रथम बाजरा, राई/सरसों, कुल तिलहन, ग्वार तथा मोटा अनाज
राजस्थान द्वितीय मूंगफली
राजस्थान तृतीय कुल दलहन, चना तथा सोयाबीन

राजस्थान का योगदान

क्र.सं. फसल 1st 2nd 3rd राजस्थान का योगदान (%)
1 ग्वार RJ HR GJ 88.80%
2 राई/सरसों RJ MP UP 43.43%
3 बाजरा RJ UP GJ 41.34%
4 कुल तिलहन RJ MP GJ 23.61%
5 मोटा अनाज RJ KR UP 14.21%
6 मूंगफली GJ RJ MP 19.91%
7 चना MP MH RJ 17.39%
8 कुल दलहन MP MH RJ 13.76%
9 सोयाबीन MP MH RJ 8.96%

स्रोत: भारत सरकार द्वारा प्रकाशित कृषि सांख्यिकी–2024 के आधार पर-

  • राज्य में पहली बार पृथक रूप से कृषि बजट (2022–23) को "समृद्ध किसान – खुशहाल राजस्थान" की अवधारणा के साथ प्रस्तुत किया गया।

3. किसानों के लिए एकीकृत प्रणाली

A. बीज

मुख्यमंत्री बीज स्वावलंबन योजना

  • शुरुआत: वर्ष 2017
  • वर्ष 2018–19 से राज्य के 10 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में प्रारंभ, बाद में पूरे राजस्थान में लागू
  • राज्य की नोडल एजेंसी : राजस्थान राज्य बीज निगम लिमिटेड (RSSCL)
  • बीज प्रमाणीकरण संस्था: राजस्थान राज्य बीज एवं जैविक उत्पादन प्रमाणीकरण एजेंसी

B. उर्वरक और मृदा स्वास्थ्य

मृदा स्वास्थ्य कार्ड :

  • शुरुआत – 19 फरवरी 2015
  • स्रोत: गंगानगर (श्रीगंगानगर)
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिवस: 19 फरवरी
  • वर्ष 2022-23 में इसका विलय राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) में किया गया।
  • वर्ष 2025-26 में 4.15 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को जारी किए गए।
  • राज्य के सभी 352 ब्लॉकों में योजना लागू करना।

गौवर्धन जैविक उर्वरक योजना :

  • प्रमुख प्रावधान: इस योजना के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में 50 किसानों को पशु अपशिष्ट का उपयोग कर जैविक खाद (वर्मी कम्पोस्ट) के उत्पादन हेतु प्रति किसान ₹10,000 तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
  • आवेदन प्रक्रिया: इसके आवेदन राज किसान पोर्टल पर ऑनलाइन किए जा सकते हैं।
कृषि क्लीनिक :
  • उद्देश्य: मृदा परीक्षण, फसलों संबंधी जानकारी, कीट एवं रोगों के उपचार की जानकारी
  • प्रमुख प्रावधान: राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर एग्री क्लीनिक स्थापित किए जाएंगे
  • स्थिति:
    • 2024–25: 20 एग्री क्लीनिक (स्थापित)
    • 2025–26: 13 एग्री क्लीनिक (प्रगतिशील/स्थापनााधीन)

नमो ड्रोन दीदी योजना (अध्याय 10 में विस्तार से वर्णित)

  • उद्देश्य: कृषि में नवाचारों का समावेश जैसे– ड्रोन तकनीक से नैनो यूरिया एवं कीटनाशकों का छिड़काव।
  • प्रावधान: इसके अंतर्गत भारत सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को 1,070 कृषि ड्रोन तथा उनके परिवहन हेतु वाहन खरीदने के लिए ऋण पर 3% ब्याज अनुदान (Interest Subvention) प्रदान करेगी।

पशु सखी और कृषि सखी(अध्याय 10 में विस्तार से वर्णित)

  • राजीविका की गतिविधियाँ मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा संचालित
  • पशु सखी37,369 कार्यरत।
  • कृषि सखी36,787 कार्यरत।

C. कृषि ऋण/साख

  • उद्देश्य: कृषि में उत्पादकता तथा स्थिरता को बढ़ाने के लिए इनपुट, उपकरण और अन्य बुनियादी सुविधाएँ

सहकारी ऋण द्वारा समावेशी विकास

  • केन्द्रीय सहकारी बैंक (अल्पकालिक ऋण हेतु) = 29
  • प्राथमिक भूमि विकास बैंक (दीर्घकालिक ऋण हेतु) = 36
  • कुल 42,858 सहकारी समितियाँ:
  • 23 – संघ
  • 24 – दुग्ध संघ
  • 38 – उपभोक्ता थोक दुकानें
  • 285 – सामान्य विपणन तथा फल एवं सब्जी सहकारी विपणन समितियाँ
  • 9,086 – प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियाँ (PACS)
सहकारी संस्थाओं का विस्तार (2025–26)
  • 1,432 नई प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों (PACS) के गठन की स्वीकृति।
  • 288 LAMPS (Large Sized Adivasi Multi-Purpose Cooperative Societies) के गठन की स्वीकृति।
  • 32 महिला बहुउद्देशीय सहकारी समितियों के गठन की स्वीकृति।
महिला सहकारिता
  • 1,035 राजीविका महिला सर्वांगीण विकास सहकारी समितियाँ।
  • 8.70 लाख से अधिक महिलाएँ लाभान्वित।
शून्य प्रतिशत ब्याज पर अल्पकालीन कृषि ऋण
  • केन्द्रीय सहकारी बैंकों द्वारा सहकारी समितियों के माध्यम से फसली ऋण।
  • समय पर ऋण चुकाने वाले किसानों को ब्याज अनुदान
राजस्थान ग्रामीण आजीविका ऋण योजना
  • शुरुआत: अक्टूबर 2022
  • लघु एवं सीमांत कृषक परिवारों को गैर-कृषि गतिविधियों हेतु ₹2 लाख तक ऋण
सहकार किसान कल्याण योजना
  • उद्देश्य: कृषि एवं कृषि-संबंधित आवश्यकताओं हेतु ऋण।
  • केन्द्रीय सहकारी बैंक/ग्राम सेवा सहकारी समितियों द्वारा ₹10 लाख तक ऋण
कृषि उपज गिरवी ऋण योजना
  • कृषि उपज गिरवी रखने पर 3% ब्याज दर से ऋण।
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC)
  • अल्पकालीन फसली ऋण उपलब्ध।
स्वरोजगार क्रेडिट कार्ड योजना
  • राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा।
  • गैर-कृषि गतिविधियों हेतु ₹50,000 तक ऋण
  • ऋण अवधि: 5 वर्ष।
राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड (GCC)
  • उद्देश्य: डेयरी एवं पशुपालन को बढ़ावा।
  • ₹1 लाख तक ब्याजमुक्त अल्पकालीन ऋण
  • लक्ष्य: 2.5 लाख दुग्ध उत्पादक कृषक परिवार।
  • RAJSSO पोर्टल (राज सहकार ऐप) के माध्यम से।
  • बजट: ₹150 करोड़।
कृषि अवसंरचना निधि (AIF)
  • शुरुआत: 15 मई 2020
  • अवधि: 2020–2032
  • उद्देश्य: फार्म-गेट अवसंरचना का विकास।
  • ₹1 लाख करोड़ का कोष।
  • ₹2 करोड़ तक के ऋण पर 3% वार्षिक ब्याज सहायता
  • अल्पकालीन कृषि ऋण की समय पर अदायगी वाले किसानों को राज्य सरकार द्वारा ब्याज अनुदान

D. फसल बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)

  • प्रारंभ: 18 फरवरी, 2016
  • उद्देश्य: प्राकृतिक आपदाओं से फसल हानि होने पर किसानों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।
फसल प्रीमियम
खरीफ 2%
रबी 1.5%
वाणिज्यिक/बागवानी फसलें 5%

महत्वपूर्ण तथ्य

  • शेष प्रीमियम का भार केंद्र एवं राज्य सरकार वहन करती हैं।
  • खरीफ 2020 से संशोधित दिशा-निर्देश लागू।
  • असिंचित क्षेत्रों के लिए 30% तथा सिंचित क्षेत्रों के लिए 25% से अधिक प्रीमियम पर केंद्र सरकार अनुदान प्रदान करती है।

4. सतत उद्यानिकी 

A. राजस्थान में उद्यानिकी प्रथाओं को बढ़ावा देना

1. राष्ट्रीय बागवानी मिशन (NHM)
  • उद्देश्य: राजस्थान में फल, फूल एवं मसालों के उत्पादन तथा उद्यानिकी अवसंरचना को बढ़ावा देना।
  • राजस्थान के 41 जिलों में लागू।
  • 2,358 हेक्टेयर में फलोद्यान स्थापित।
  • 9 वर्मी-कम्पोस्ट इकाइयाँ स्थापित।
  • 19 जल संचयन संरचनाओं का निर्माण।
  • 1,129 कम लागत वाली प्याज भंडारण संरचनाएँ स्थापित।

2. राष्ट्रीय बाँस मिशन

  • केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)
  • मुख्य उद्देश्य: सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र में बाँस पौधों के उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • उच्च तकनीक एवं लघु नर्सरियों का विकास।
  • कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम।

3. एग्रोफॉरेस्ट्री योजना

  • Agroforestry = कृषि + वानिकी
  • मुख्य प्रावधान: सार्वजनिक एवं निजी दोनों क्षेत्रों में उच्च तकनीक वाली नई नर्सरियों की स्थापना।
  • मौजूदा नर्सरियों में पौध उत्पादन
  • वर्ष 2025–26 में सार्वजनिक क्षेत्र में राज्य के 3 अलग-अलग स्थानों पर 4 उच्च तकनीक नर्सरियाँ स्थापित की जा रही हैं।
  • वर्ष 2025–26 में ₹285 लाख का बजट प्रावधान।

4. राष्ट्रीय कृषि विकास योजना — RKVY

  • शुरुआत: 2007–08
  • वित्तीय पैटर्न: केंद्र : राज्य = 60 : 40
  • उद्देश्य
  • कृषि में निवेश बढ़ाना
  • संरक्षित खेती को बढ़ावा देना।
  • नर्सरी विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्रों को मजबूत करना।
  • उत्कृष्टता केंद्र: निम्न स्थानों पर ध्यान केंद्रित किया गया है:
  • धौलपुर
  • सवाई माधोपुर
  • टोंक
  • बूंदी
  • चित्तौड़गढ़
  • झालावाड़
  • बस्सी (जयपुर)
  • नांता (कोटा)

B. कृषि सुधार के लिए प्रमुख पहलें

1. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM)

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन (NFSNM)
गेहूँ एवं दलहन हेतु NFSNM मोटे अनाज हेतु NFSNM पोषक अनाज (श्री अन्न) हेतु NFSNM वाणिज्यिक फसलों हेतु NFSNM
• 2007-08 से प्रारंभ
• केंद्र प्रायोजित योजना
गेहूँ हेतु 18 जिले
दलहन हेतु 41 जिले
• 2018-19 से प्रारंभ
मक्का हेतु 9 जिले
जौ हेतु 9 जिले
• 2018-19 से प्रारंभ
• बाजरा हेतु 28 जिले
• ज्वार हेतु 11 जिले
• कपास हेतु 18 जिले

⇒ नोट :- भारत सरकार ने 2025-26 से दलहन हेतु उपर्युक्त मिशन को ‘दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन’ में शामिल कर दिया है।

   ♦ दलहन में आत्मनिर्भरता मिशन -

  • अवधि- वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक।
  • उद्देश्य:-
  • राज्य में दलहन उत्पादन को बढ़ाना (विशेष रूप से तुअर, उड़द एवं मसूर)
  • जलवायु-अनुकूल बीजों के उत्पादन एवं उपलब्धता को बढ़ाना
  • दलहन की खेती के क्षेत्रफल में वृद्धि करना
  • भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना
  • NAFED द्वारा तुअर, उड़द एवं मसूर की 100 प्रतिशत खरीद सुनिश्चित करना
  • पीएम-आशा के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना (PSS) के मानदंडों के अनुसार अन्य दलहनों की खरीद सुनिश्चित करना
  • प्रोटीन की मात्रा में वृद्धि करना आदि।

2. राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – तिलहन

  • वित्त पोषण 60 : 40 (केंद्र : राज्य)
  • ब्रीडर बीज की खरीद (100% केंद्रीय सहायता), प्रमाणित बीज वितरण, किसान प्रशिक्षण, अवसंरचना विकास आदि गतिविधियाँ शामिल।
  • 6 TBO – ट्री बॉर्न ऑयलसीड्स (TBO) के तहत 6 TBO यथा ऑलिव, महुआ, नीम, जोजोबा, करंज और जेट्रोफा की बुवाई के लिए सहायता उपलब्ध करवाई जाती है।
3. राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA)
  • वित्त पोषण – 60 : 40 (केंद्र : राज्य)
  • उद्देश्य राज्य के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के अनुसार एकीकृत कृषि प्रणालियों (IFS) को बढ़ावा देना, जैसे-
  • पशुधन आधारित कृषि प्रणालियाँ
  • बागवानी आधारित कृषि प्रणालियाँ
  • कृषि वानिकी (वृक्ष आधारित) कृषि प्रणालियाँ
  • वर्मी कम्पोस्ट इकाइयाँ
  • मधुमक्खी पालन आदि।
4. परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY)
  • जैविक खेती में पर्यावरण-अनुकूल एवं न्यूनतम लागत वाली तकनीकों के प्रयोग से रसायनों एवं कीटनाशकों का प्रयोग कम करते हुए कृषि उत्पादन को बढ़ावा देना।
  • क्लस्टर एवं पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (PGS) आधारित जैविक कृषि को बढ़ावा देना।
5. Adaptive Trial Centre (ATC) एवं जैविक खेती
  • उद्देश्य: नई कृषि तकनीकों की अनुकूलता एवं आर्थिक व्यवहार्यता का परीक्षण।
  • जैविक खेती अपनाने वाले 3 किसानों को प्रत्येक वर्ष ₹1 लाख का प्रोत्साहन पुरस्कार दिया जाता है।
6. राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन
  • शुरुआत: वर्ष 2025-26
  • केंद्र प्रायोजित योजना
  • उद्देश्य: राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।
  •  इसके अंतर्गत राज्य में कुल 2,000 क्लस्ट गठित किए गए हैं।
  • केंद्रीय – 1,800
  • राज्य – 200
  • 2.50 लाख किसानों के साथ ₹1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को शामिल किया गया है।
7. प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
  • शुरुआत: 11 अक्टूबर, 2025
  • अवधि: 6 वर्ष
  • उद्देश्य: कृषि क्षेत्र में उत्पादकता, विविधता, आय एवं सततता को बढ़ावा देना।
  • 11 मंत्रालयों एवं विभागों की 36 प्रमुख योजनाओं को एकीकृत किया गया है।
  • देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों में लागू।
  • राजस्थान के 8 जिलों में लागू:
जिले चयन के आधार
  • निम्न उत्पादकता
  • कम फसल सघनता
  • औसत से कम क्रेडिट मानक

5.फसल कटाई के बाद प्रबंधन

  1. भण्डारण
  2. प्रसंस्करण
  3. विपणन

A. भण्डारण

  • प्रमुख एजेंसी: राजस्थान राज्य भण्डारण निगम (Rajasthan State Warehousing Corporation)
  • 36 जिलों में 97 गोदाम (भण्डार गृह) हैं, जिनकी दिसम्बर 2025 तक कुल भण्डारण क्षमता 17.25 लाख मीट्रिक टन है।
  • वर्ष 2025-26 में गोदाम क्षमता का उपयोग 8.25 लाख मीट्रिक टन था, जो कुल भण्डारण क्षमता का 48% है।
  • राज्य अन्य सभी राज्यों एवं केन्द्र की तुलना में सर्वाधिक भण्डारण शुल्क छूट प्रदान करता है।
  • छूट :–
    SC/ST किसान  70%
    किसान उत्पादक संगठनों (FPOs)  60%
    सामान्य किसान  30%
    सहकारी समितियाँ 10%

B. प्रसंस्करण

आर्थिक विकास एवं प्रसंस्करण हेतु विभिन्न प्रयास

1. Rising Rajasthan Summit, 2024

  • कुल 2524 समझौता ज्ञापन (MoU) को अंतिम रूप दिया गया।

2. प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योग उन्नयन योजना (PM-FME)

  • खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संचालित।
  • उद्देश्य: देश में असंगठित खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के उन्नयन के लिए।
  • राज्य में नोडल एजेंसी: राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (RSAMB)।
  • वित्त पोषण: केन्द्र : राज्य = 60 : 40
  • अवधि: 5 वर्ष (2021 से 2025-26 तक विस्तारित)।
  • प्रावधान:
  • व्यक्तिगत श्रेणी की खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना अथवा विस्तार हेतु परियोजना लागत का 35% या अधिकतम ₹10 लाख का अनुदान
  • स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को ₹40,000 की सीड मनी।
  • साझा अवसंरचना निर्माण हेतु 35% या अधिकतम ₹3 करोड़ की सब्सिडी
  • ब्रांडिंग एवं मार्केटिंग हेतु 50% अनुदान
  • अनुदान राशि संबंधित बैंक शाखा को हस्तांतरित की जाती है तथा 3 वर्ष की लॉक-इन अवधि के पश्चात ऋण खाते में समायोजित की जाती है।
  • इसके अंतर्गत राज्य के 8 जिलों में 8 इनक्यूबेशन सेंटर स्वीकृत किए गए हैं।
3. राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव, 2025
  • आयोजन: 8 सितम्बर, 2025 को।
  • स्थान: बिड़ला ऑडिटोरियम, जयपुर।
  • राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड (RSAMB) द्वारा विकसित ‘राज स्पाइस ऐप’ का शुभारंभ मुख्यमंत्री द्वारा किया गया।
4. राजस्थान निवेश संवर्धन नीति (RIPS), 2024

→ एग्रो एवं फूड प्रोसेसिंग उद्यम/इकाइयों को प्रोत्साहन:

  • सामान्य: पूंजी निवेश का 50% या ₹1.5 करोड़ (अधिकतम)
  • SC/ST/महिला: अतिरिक्त 5% पूंजी सब्सिडी।

अन्य: फूड पार्क विकास और भूमि आवंटन नीति, 2024

C. विपणन

  • राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड – 1974
  • कृषि विपणन निदेशालय – 1980
  1. कृषक उपहार योजना जनवरी, 2022
    ई-नाम पोर्टल से उपज विक्रय करने पर लाभ–
    ✓ प्रति ₹ 10,000 की बिक्री पर 1 कूपन
    ✓ उपज के मूल्य के गुणक के अनुसार अतिरिक्त कूपन।
  2. सहकारी विपणन संरचना:- 285 क्रय-विक्रय समितियाँ व फल-सब्जी विपणन समितियाँ।
  3. राष्ट्रीय सहकारी मसाला मेला 2025 9 से 18 मई, 2025, जवाहर कला केन्द्र, जयपुर
  4. सहकारी उपभोक्ता संरचना :-
    उद्देश्य– उपभोक्ताओं को कालाबाजारी और बाजार में वस्तुओं की कृत्रिम कमी से बचाने हेतु।
    • इसके लिए कुल 38 सहकारी थोक भंडार पंजीकृत किए गए हैं, जो 33 जिला स्तर पर कार्यरत हैं।
    • उपभोक्ता क्षेत्र में राजस्थान राज्य उपभोक्ता सहकारी संघ (CONFED) एक शीर्ष संस्था के रूप में कार्य कर रहा है।
कृषि संबंध क्षेत्र

समृद्ध खेती के लिए पशुधन गोपलन मत्स्य पालन

6. पशुपालन व डेयरी

समृद्ध खेती के लिए पशुधन

  • पशुगणना 2019 के अनुसार – 568.01 लाख पशुधन (देश का कुल 10.60%)
  • देश का 84.43% ऊंट
                ≈ 14.00% बकरियाँ
                ≈ 10.64% भेड़
                ≈ 12.47% भैंस
                ≈ 7.24% गोवंश
  • राज्य का योगदान (2023–24)
    दुग्ध उत्पादन 14.51%
    ऊन उत्पादन 47.53%
उत्पादन (2023–24)
दूध
34733 हजार टन
अण्डे
3087 मिलियन
मांस
247 हजार टन
ऊन
160 लाख किग्रा
  • कुक्कुट विकास – 146 लाख
    – प्रशिक्षण केन्द्र: अजमेर

पशुधन विकास :-

उद्देश्य :- विभिन्न सरकारी योजनाओं और पहलों के माध्यम से पशुओं के स्वास्थ्य, उत्पादकता और कल्याण में सुधार करना

1. पशुपालकों के लिए कॉल सेंटर –1962 – 24 फरवरी 2024 से राज्य भर में -
   ⇒ मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन: कुल 536
   ⇒ चिकित्सा आपातकालीन सेवा 108

2. पशुमित्र योजना :-
उद्देश्य :- पशुपालन सेवाओं जैसे टैगिंग, टीकाकरण, बीमा कृत्रिम गर्भाधान (नस्ल सुधार) आदि को किसानों तक पहुँचाना।

3. ऊँट संरक्षण अनुदान
• नवजात ऊँटों के लिए सहायता– ऊँट प्रजनन को प्रोत्साहन देने हेतु 2 किश्तों में ₹20,000 की सहायता (प्रत्येक बछड़े के लिए, जन्म के 0–2 महीने की आयु पर और फिर 1 वर्ष की आयु पर)

4. पशुधन निःशुल्क स्वास्थ्य योजना: के अंतर्गत बीमार पशुओं के उपचार हेतु उपलब्ध निःशुल्क दवाओं की संख्या 138 से बढ़ाकर 200 कर दी गई है।

पशुधन किसान कल्याण पहल :-

1. मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना 1 दिसम्बर, 2025 से गाय, भैंस, भेड़, बकरी एवं ऊँट जैसी दुधी पशुओं के लिए निःशुल्क बीमा कवरेज प्रदान।

  • 42 लाख पशुओं को निःशुल्क बीमा कवरेज (बजट 2025–26 का लक्ष्य)
  • प्रीमियम रेट
    गाय, भैंस, ऊँट– ₹40,000 प्रति पशु
    भेड़, बकरी– ₹4,000 प्रति पशु
  • बीमा प्रीमियम का 100 प्रतिशत राज्य सरकार द्वारा वहन

2. पण्डित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा

  • 24 जून से 9 जुलाई, 2025 तक
  • उद्देश्य :- राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अन्त्योदय वर्ग तक पहुँचाना।
  • बीमार पशुओं का उपचार, पशुओं को विभिन्न संक्रामक रोगों के विरुद्ध टीकाकरण

3. ग्रामीण सेवा शिविर अभियान, 2025 इसके अंतर्गत 21 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया गया।

4. राज सखा सुरक्षा कवच बीमा योजना :-

  • प्रावधान
    दुग्ध उत्पादक की दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर– ₹5 लाख
    आंशिक स्थायी विकलांगता पर ₹2.5 लाख
  • नई चरण 1 फरवरी, 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक लागू।

5. सरस सामूहिक बीमा योजना:-

  • कुल – 19 चरण
  • जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघों द्वारा दुग्ध उत्पादकों का बीमा किया जाता है।

6. मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक सम्बल योजना :-

  • 1 फरवरी, 2019 से प्रारम्भ
  • ₹2 से बढ़ाकर ₹5 प्रति लीटर के हिसाब से अनुदान राशि राजस्थान सरकार की तरफ से प्रदान की जाएगी। (2022–23 से)

7. सक्रिय मछुआरों के लिए समूह दुर्घटना बीमा योजना: राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड, हैदराबाद के तहत राज्य के मछुआरों को कवर किया गया है।

8. राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM) :- 2014–15

  • भेड़ व बकरी वंश हेतु नस्ल सुधार योजना
  • पशुपालकों को उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण

डेयरी विकास :- सहकारी समितियों के माध्यम से क्रियान्वित: